क्या तैयार हो रहा है नया पावर ब्लॉक. पुतिन की भारत यात्रा के पीछे की असली कहानी

पुतिन के भारत दौरे को पूरी दुनिया सांस रोककर देख रही है. यूक्रेन युद्ध और अमेरिका के बढ़ते दबाव के बीच यह मीटिंग बेहद रणनीतिक मानी जा रही है. भारत पर अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने के आरोप में 25 फीसद अतिरिक्त लेवी लगाई है लेकिन भारत साफ कह चुका है कि उसकी ऊर्जा नीति केवल राष्ट्रीय हित पर आधारित है. ऐसे वक्त में पुतिन का भारत आना एक बड़ा भू-राजनीतिक संदेश माना जा रहा है.
रक्षा सौदों से बदल जाएगा समीकरण
इस मुलाकात में सबसे बड़ा फोकस रक्षा सहयोग पर है. चर्चा में सुखोई Su 57 का जॉइंट प्रोडक्शन सबसे ऊपर माना जा रहा है. रूस अपनी जमीन पर भारतीय सेना की तैनाती पर नई सहमति दे चुका है जिससे दोनों देशों के बीच मिलिट्री सहयोग और भी मजबूत होगा. टेक्नोलॉजी ट्रांसफर से लेकर मिसाइल सिस्टम तक इस बार डीलें काफी गहरी होने वाली हैं.
स्पेस और साइंस में नई उड़ान
रूसी एजेंसी रोस्कोस्मोस भारत के साथ मिलकर इंजन निर्माण से लेकर मानव अंतरिक्ष मिशन तक में साझेदारी बढ़ाने जा रही है. गगनयान मिशन में भी रूस का रोल अहम है. दोनों देशों का उद्देश्य अंतरिक्ष क्षेत्र में पश्चिमी देशों पर निर्भरता को कम करना है और इस दौरे में इसके कई बड़े समझौते हो सकते हैं.
डॉलर को चुनौती देने की तैयारी
भारत और रूस आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने के लिए अपने नेशनल पेमेंट सिस्टम को जोड़ने जा रहे हैं. मीर कार्ड और रूपे कार्ड को लिंक करने की तैयारी है और आगे चलकर UPI और रूस का SBP भी जुड़ सकता है. करीब 90 फीसद व्यापार पहले ही रुपये और रूबल में होने लगा है जिससे डॉलर की पकड़ कमजोर होगी.
ट्रेड में बड़ी छलांग का लक्ष्य
दोनों देशों ने 2030 तक ट्रेड को 100 बिलियन डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा है. अभी भारत रूस से 64 बिलियन का आयात करता है जबकि सिर्फ 5 बिलियन का निर्यात. इस असंतुलन को कम करने के लिए पुतिन इस यात्रा में बड़े वादे कर रहे हैं. यह दौरा साफ संकेत देता है कि भारत और रूस मिलकर एक नया वैश्विक समीकरण गढ़ने की दिशा में बढ़ रहे हैं.